Sunday, 27 March 2011

बाक्‍साइट और लोहरदगा : एक परिचर्चा


                

लोहरदगा में करीब नौ दशक से बाक्‍साइट का उद्योग चल रहा है. बाक्‍साइट की नगरी में बाक्‍साइट पर परिचर्चा का आयोजन पहली बार होने जा रहा है. आयोज‍क है बिगुल (बौद्धिक चेतना का शंखनाद) फोरम जो इसी बिषय के साथ बहस के मंच में अपनी कदम भी रख रहा है. बिषय है बाक्‍साइट और लोहरदगा स्थिति, आकलन और सम्‍भवना. बाक्‍साइट से लाल हो चुके इस शहर में उपरोक्‍त बिषय पर चर्चा बे‍हद आम है लेकिन बिषय पर आम बहस कि बात से हर कोई सहम सा जा रहा है. दरअसल नब्‍बे सालों में बाक्‍साइट के धूल कण ने सभी की आखों में इतनी परत जमा दी है कि सब कुछ साफ साफ नजर नहीं आता है. बाक्‍साइट के संबंध में बहुत कुछ है जिसकी परदेदारी है.......

हर शख्‍स कि निगाहें साजि‍शी, हर चेहरे का शरम महज एक वहम है.
हर लब कि खामोशी पर छिपा है राज, गहरे तक कुछ दबा है परदेदारी में है समाज...

बिषय पर बहस के नाम पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं.. बाक्‍साइट के धंधे में जो परोक्ष जुडे हैं वो तो सहमे हैं हीं और जो प्रत्‍यक्ष शामिल हैं वे सफेद हुए जा रहें हैं. पुरे नब्‍बे बरस तक बा‍रिश ने हर साल बाक्‍साइट के धूल कण धोए हैं.. बाक्‍साइट के पहाडों, सडकों और घर के छतों दिवारों  से बारिश ने लाल धूल को बहा कर शंख और कोयल नदी के सहारे ना जाने कहां ले जा कर प्रवाहित कर दिया है.. फिर भी इस बिषय पर बहस के नाम से हर काई भय कि आशंका से भर जारहा है. मानो गहरे खोद कर पुराना जख्‍म उभारने की बात हो रही हो.. बारिश ने भी कुछ बेईमानी की है, पानी में धुल कण बहे नही बल्कि और ज्‍यादा जम गए हैं.. खैर मेहनत ज्‍यादा हीं सही बिगुल ने शंखनाद कर दी है.... परिकल्‍पना और फैसले से खतरा उठा लिया है.. बिखरे स्‍वरों से सरगम साधने की कोशिश शुरू की है.......


  

No comments:

Post a Comment